जानवरों की बीमारी इंसानों के लिए बड़ा खतरा
डॉक्टरों और पशु चिकित्सकों का कहना है कि जानवरों को होने वाली टीबी की बीमारी इंसानों के लिए काफी खतरनाक हो सकती है। हालांकि पहले इसे ज्यादा बड़ा खतरा नहीं माना जाता था। जानवरों को यह बीमारी दूषित भोजन खाने से होती है। अगर इंसानों को इस तरह से टीबी की बीमारी हो जाए तो हालत ज्यादा गंभीर हो सकती है और उसका इलाज भी टीबी की आम बीमारियों के मुकाबले ज्यादा मुश्किल होगा। साल 2035 तक दुनिया से टीबी की बीमारी को दूर करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित कई संस्थाओं का कहना है कि जानवरों को होने वाली टीबी की बीमारी को कई दशकों से नजरअंदाज किया जा रहा है। इंसानों में जानवरों से होने वाले संक्रमण की सबसे बड़ी वजह कच्चे दूध का सेवन है। जानवरों को होने वाली टीबी जिसे जूनोटिक टीबी कहते हैं, यह टीबी उन लोगों को भी हो सकती है जो इस बीमारी वाले जानवरों के ज्यादा करीब रहते हैं। इनमें पशु चिकित्सक, किसान और कसाई भी शामिल है। सबसे बड़े आंकड़े के मुताबिक हर साल जानवरों में करीब 120000 से ज्यादा टीबी के मामले सामने आते हैं। लेकिन यह आंकड़ा इंसानों को होने वाली टीबी के मुकाबले बहुत छोटा है। इंसानों को होने वाली टीबी दुनिया का सबसे बड़ा जानलेवा संक्रमण है। टीबी और फेफड़े से जुड़ी बीमारियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय संगठन से जुड़े डॉक्टर पॉला फु़जिवारा के अनुसार दुनिया भर में हर साल करीब 9000000 लोग टीबी की बीमारी के चपेट में आते हैं। इसमें जू़नोटिक टीबी का अनुपात भले ही कम हो लेकिन इस टीबी से भी बहुत सारे लोग संक्रमित होते हैं।

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