जानवरों को पसंद नहीं भेदभाव
एक शोध में यह बात स्पष्ट हुई है कि जानवरों को और खासकर कुत्ते और भेडिए को आपसी भेदभाव करना पसंद नहीं आता। कुत्तों के बारे में अब तक माना जाता था कि भेदभाव नापसंद करने का गुण उनके अंदर इंसानों के साथ रहने की वजह से आया है, लेकिन यह रिसर्च इस बात को गलत साबित करती है। इस रिसर्च में झुंड में रहने वाले एक कुत्ते और एक भेडिए को अलग-अलग पिंजरों में रखा गया। इन पिंजरों में एक घंटी लगाई गई जिसे बजाने पर दोनों को कुछ इनाम मिला। कई बार ऐसा हुआ कि कुत्ते और भेड़िए दोनों ने समान कार्य किए लेकिन सिर्फ किसी एक को इनाम मिला। रिसर्च में सामने आया कि जब दोनों में से किसी एक को बड़ा इनाम मिला तो दूसरे ने काम करने से इंकार कर दिया। विएना में यूनिवर्सिटी ऑफ वेटनरी मेडिसिन की जेनिफर एसलर कहती हैं, "जब भेदभाव ज्यादा होता था तो वे काम करना बंद कर देते थे, कुछ के मामलों में यह प्रतिक्रिया बहुत जल्दी ही देखने को मिली।" उन्होंने कहा, "एक भेड़िए को जब तीसरी बार काम करने के बाद भी कुछ नहीं मिला तो उसने काम करना बंद कर दिया, मुझे लगता है कि वो इतना गुस्से में था कि उसने पिंजड़े में लगी घंटी को ही तोड़ दिया।" जेनिफर कहती हैं, "ये बात ज्यादा ठीक जान पड़ती है कि दोनों जानवरों में ये ज्ञान किसी साझा पूर्वज से आया हो। न कि ये ज्ञान दो बार आया है या ये इंसानों के साथ रहने की वजह से आया है।" वैसे, ऐसा नहीं है कि कुत्तों पर इंसानों का जरा भी असर नहीं पड़ा। जेनिफर कहती हैं, "पालतू कुत्ते झुंड में रहने वाले कुत्तों के मुकाबले थोड़े ज्यादा सहनशील हो जाते हैं।"

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